अध्यात्मिक योग

IMG-20160223-WA0015

आईए जाने अध्यात्मिक व्यक्तियों के ग्रह योग।
____________________________________

पंचम भाव प्रेम का है, वही भाव भक्ति का भी है, ध्यान का भी है.. बुद्धि व एकाग्रता का भी है.. जब यह भाव व भावेश सप्तम से(विवाह/संबंध) से संबंध बनाए तो प्रेम प्रसंग होता है और जब यह भाव व भावेश(भाव की राशि का मालिक ग्रह)
जब नवम भाव या भावेश से संबंध बनाए तो ऊर्ध्वगामी शक्ति का योग बनाता है, मतलब उस व्यक्ति की ऊर्जा दुनियावी संबंधो में कम और परमात्मा से संबंध में ज्यादा खर्च होगी। नवम भाव सद्गुरु का भाव है, धर्म का भाव है, अध्यात्म, तीर्थ नियम आदि का भाव है।
.
ऐसे ही द्वितीय भाव भोग का भाव है, जब द्वितीय या द्वितीयेश शुभ ग्रहों से संबंध बनाते हैं तो नैतिकता जागृत होती है। ऐसे व्यक्ति अष्टांग योग ,पंच व्रत, ब्रह्मचर्य आदि मार्ग की तरफ चल पडते हैं। व्यक्ति सत्यवादी होता है और वाणी सिद्ध हो जाया करती है।
.
द्वादश भाव अन्तिम भाव है,अन्तिम पड़ाव या कहे मोक्ष का भाव.. यहाँ केतु हो जो की अध्यात्म की तरफ धकेलता ही है और इसका संबंध नवम भाव के मालिक से हो तो मोक्ष की आकांक्षा या वैसी मनोवृत्ति जगाता है। द्वादश में क्रूर ग्रह यथा सूर्य, मंगल व शनि मोक्ष की इच्छा देते हैं.. शुक्र यहाँ रहे तो दुनियावी सुख दे देता है खूब। ऐसे में व्यक्ति माया बद्ध रहे यही संभावना है।
.
पंचमेश शुभ हो और अकेला हो.. उस पर कोई दृष्टि ना हो तो यह एकांत भगवत चिंतन का योग है। ऐसा व्यक्ति सहज ही ध्यानस्थ हो जाएगा और उसको विचार कम उठेंगे।
.
बिना किसी दृष्टि या युति वाला शुभ बृहस्पति उच्च आदर्श प्रदान करता है। बृहस्पति शुभ है तो निश्चित रूप से गुरुओं व कामिल सिद्धो पीरो से लाभ होगा। अनायास ही उच्च केन्द्रो से कृपा प्राप्त होगी।
.
शनि का सीधा संबंध वैराग्य से है। यह अकेला हो और मुदित हो तो यह वैरागी स्वभाव देगा।
.
पंचम भाव अतीन्द्रिय शक्ति का भी जन्मदाता है,यहाँ गूढ तंत्र का ग्रह राहु हो या केतु अथवा शनि और उसे गुरु देखे तो व्यक्ति सफल साधक बनता है।
.
पंचम भाव भक्ति.. अष्टम भाव गूढता व नवम भाव धर्म व गुरुज्ञान .. अब इन सबका संबंध बने तो निश्चित रूप से अध्यात्म में वह व्यक्ति छुपा हुआ हीरा होता है।
.
इस संबंध में ओशो की कुंडली पर चिन्तन किया जा सकता है, पंचमेश बुध, नवमेश शनि व द्वादशेश मंगल अष्टम भाव में युति किए हैं और अष्टमेश गुरु उच्च राशि में स्थित है अतः यह व्यक्ति रहस्यवादी, गहन अन्वेषक, तार्किक और वास्तव में अनुभव सिद्ध हुआ।
अष्टम भाव गूढता का भाव है वहाँ पंचमेश हो तो चाहे व्यक्ति अध्यात्म से जुडे या नहीं लेकिन अन्वेषक, वैज्ञानिक प्रकृति का अवश्य होगा।
॥राम॥

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *