कृष्ण तत्व

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कृष्ण को क्या कहें?
अवतार? अवतारों का तो उद्देश्य हुआ करता है..
भला ये बाँसुरी बजाना,माखन चुराना,या कपड़े लेकर भागना क्या महत्वपूर्ण उद्देश्य हुए? जरा सोचिए ये कृष्ण क्या है? जरा सोचिए ये बाँसुरी ही क्यों है इसके हाथ में?
जरा सोचिए,सदैव नृत्य मुद्रा ही क्यों है इसके भावों में? क्यों एक वक्र मुस्कान है सदैव?
जेल में जन्म, फिल्मी अन्दाज में माँ बाप की अदला बदली, फिर बचपन से ही नाग,बक,बैल आदि से युद्ध,मामा की हत्या,मथुरा से पलायन, मतलब लगातार कानून तोडे, मान्यताएँ तोड़ी, यहाँ तक की देवपूजा बन्द करवा दी..
ये हैं पूर्णत्व का वाहक कृष्ण..
जब जो क्षण है उसे पूर्णता से जीता पूर्ण पुरुष, बाल्य काल ऐसा जी गया की हर कोई मोहित, बड़ा हुआ तो कौतुक किए सब,एक मँझे हुए नर्तक सा ये हर कदम चला.. प्रेम किया तो आगे पीछे का नहीं देखा और बस डूबा…उतरता गया जब तक द्वैत खत्म ना हो गया हो..बिना किसी आशा अपेक्षा के…बिना बन्धन के।

जब अर्जुन से कहता है… युद्ध कर, कर्म कर….जो जिस क्षण तेरे समक्ष कार्य हो उसे कर परन्तु खुद को कर्ता मत समझ…निमित्त मान और ये जान ले की तू नहीं वो कर रहा है…वो परमात्मा तेरे द्वारा सब कर रहा है.. ये महान सोच थी, ये मानवता को एक देन थी मानसिक झँझावातो से मुक्त हो कुशलता बढाने की..
बाँसुरी थामना भी यही अर्थ रखे हुए है, खाली हो जाना,स्वयं को कर्ता ना मान वादक की शरण हो जाना.. बाँसुरी की ध्वनि,सुर,मिठास सब बजाने वाले पर निर्भर है…बाँसुरी खाली हो.. पूर्ण रूप से अपने भीतर आगमन व निकास के स्त्रोत खोल समर्पित रहती है..यही कर्मयोगी का भाव हो…समर्पित व खाली… फिर ईश्वर के उपर है नया संगीत रचना,मिठास उत्पन्न करना..
.एक नया सम्मोहन उत्पन्न करना।

जीवन सिर्फ जिया जाए तो व्यर्थ ही है,इसे उत्सव की तरह हर एक क्षण बिताना चाहिए..भूत काल व भविष्य से परे हो वर्तमान को डूब उसके रस के अंतिम कतरे तक को चख कर जीना कृष्ण तत्व है। वह भोगी है लेकिन जागा हुआ.. वह जाग चुका है..दृष्टा है। उसके लिए भोग अब इन्द्रिय विषय वस्तु है..वह खुद इनसे परे चैतन्य सत्ता है।वह मरता है हर क्षण क्योंकि नित नूतन नवीन लग रहा है हर एक क्षण..वह मरने की कला में पारंगत है इसलिए जीना सिखाता है।वह तर्कणा का सिद्धहस्त है इसलिए भावपूर्णता सिखाता है वह ओघड़ है जो शमशान में नहीं रहता, जहाँ रहता है उसका शमशान साथ चलता है,संसार में रहते हुए भी उस से निर्लिप्त… अद्भुत है ये कृष्ण..अद्भुत है इसका होना। मैं नहीं कहता की वो अवतार है या नहीं….,पर मानता हूँ वो भगवान है मेरा 🙂
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कृष्ण जन्माष्टमी की कोटिश शुभकामनाएँ।

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