कैसे पाएं क़र्ज़ से मुक्ति(ऋण मोचन)

ऋण या कर्ज, आज के युग की बड़ी भारी समस्या है, ज्योतिष के हिसाब से इसमें छठे भाव, और द्वादश भाव का बड़ी भूमिका है..! शुक्र बुध भी ऋण करवा देते हैं..! कर्जा लेना और देना, दोनों ही कभी कभी मुसीबत बन जाया करते हैं, कर्ज चाहे बैंक से लिया हो या महाजन, प्राइवेट फाइनेंसर से.. चुकाना मुसीबत बन रहा हो तो समझिये आपके कुंडली में ऋण योग है..!
हमारे शास्त्रों में ऋण से मुक्त होने की बहुत सी पूजन विधियाँ है, जैसे ऋणनाशक मंगल स्त्रोत, ऋणमोचक गणेश स्त्रोत, सभी सामान रूप से प्रभावी हैं, लेकिन कुछ पूजन या साधना करने से पहले देखें की किन ग्रह योगों से ऐसा हुआ, उनका समाधान करें और अपने द्वितीय, नवम, दशम और एकादश को बल दीजिये..ताकि अनुकूल परिस्थितियां बने और आय के साधन खुलें..!
हमारे व्यक्तिगत अनुभव में ऋण से मुक्ति के कुछ अनुभूत प्रयोग और साधना हैं जो हम आप सभी से साझा कर रहे हैं..!
ग्रहों के उपायों के अतिरिक्त, कुछ उपाय..
 
१.हर मंगलवार भूमि में गुड दबाएँ..
२. जौ और काले उरद के आटे को गुड मिले पानी में गूँथ कर छोटी छोटी गोलियां बना लें और उन्हें हर शनिवार मछलियों को खिलायें.. हो सके तो रोज ये क्रिया करें तो १ वर्ष में आप न सिर्फ ऋण से मुक्त होंगे बल्कि धनाड्य बनने के रस्ते खुलने लगेंगे.
३. नित्य एक बड़ी रोटी बनाएं, उसके चार टुकड़े करें, एक गाय को, एक कुत्ते को, एक कव्वों को, और एक टुकड़ा चौराहे पर रख आयें..
४. घर की छत हमेशा साफ़ रखें और घर में कोई गड्डा ऐसा न हो जिसमे कचरा या गंदगी पड़ी हो..!
५. हर मंगलवार गुड और लवंग हनुमान जी के मंदिर में चढ़ाएं..!
 
इन उपायों के साथ भगवन लक्ष्मीनरसिंह जी के सामने बैठ कर अगर नियमित रूप से आप इस स्त्रोत का पाठ करेंगे तो निश्चित रूप से आपके सोचे गए समय से दस गुना तेज़ आपका ऋण ख़त्म होकर आपको इस समस्या से मुक्ति मिलेगी..
ऋण  मोचक  नरसिंह लक्ष्मी  स्त्रोत..
Lakshmi_Narasimha_1478

देवकार्य  सिद्धयर्थं सभस्तंभं समुद्भवम।

श्री नृसिंह महावीरं नमामि ऋणमुक्तये।।1।।

लक्ष्म्यालिंगितं वामांगं, भक्तानां वरदायकं।

श्री नृसिंह महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ।।2।।

अंत्रांलादरं शंखं, गदाचक्रयुध धरम।

श्री नृसिंह महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ।।3।।

स्मरणात् सर्व पापघ्नं वरदं मनोवांछितं।

श्री नृसिंह महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ।।4।।

सिंहनादेनाहतं, दारिद्रयं बंद मोचनं।

श्री नृसिंह महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ।।5।।

प्रह्लाद वरदं श्रीशं, धनः कोषः परिपूर्तये।

श्री नृसिंह महावीरं नमामि ऋणमुक्तये।।6।।

क्रूरग्रह पीड़ा नाशं, कुरुते मंगलं शुभम्।

श्री नृसिंह महावीरं नमामि ऋणमुक्तये।।7।।

वेदवेदांगं यद्न्येशं, रुद्र ब्रम्हादि वंदितम्।

श्री नृसिंह महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ।।8।।

व्याधि दुखं परिहारं, समूल शत्रु निखंदनम्।

श्री नृसिंह महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ।।9।।

विद्या विजय दायकं, पुत्र पौत्रादिवर्द्धनम्।

श्री नृसिंह महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ।।10।।

भुक्ति मुक्ति प्रदायकं, सर्व सिद्धिकर नृणां।

श्री नृसिंह महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ।।11।।

उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलंतम् सर्वतोमुखं।

नृसिंह भीषणं भद्रं मृत्य मृत्युं नमाम्यहम।।

यःपठेत् इंद् नित्यं संकट मुक्तये।

अरुणि विजयी नित्यं, धनं शीघ्रं माप्नुयात।।

।।श्री शंकराचार्य विरचित सर्वसिद्धिकर ऋणमोचन स्तोत्र संपूर्णं।

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