ज्योतिष के कुछ सटीक सूत्र

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कुछ विशिष्ट योग 

१. लग्नेश यदि पाप गृह होकर आठवे भाव में हो और द्वितीय और द्वादश में से एक पीड़ित हो तो व्यक्ति काना होता है..!
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२.द्वितीयेश मंगल होकर तृतीय भाव में हो तो व्यक्ति मे चोर प्रवृति हो जाती है.. ये योग मीन लग्न और तुला लग्न में घटित होगा..!
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३.तृतीयेश यदि चतुर्थ भाव में हो तो ऐसा व्यक्ति पिता से अधिक प्रेम करता है और माता से विरोध रहता है..!
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४.द्वितीयेश यदि आठवे भाव में हो और आठवे भाव का मालिक प्रबल होकर लग्न में हो तो व्यक्ति में आत्मघाती प्रवृत्ति हो जाया करती है..!
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५. तृतीयेश पाप गृह होकर यदि सप्तम में हो और सप्तमेश यदि दूषित हो या पीड़ित हो तो ऐसे जातक के वैवाहिक जीवन में किसी तीसरे व्यक्ति की वजह से समस्या आती है..!
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६.चतुर्थेश यदि लग्न में हो तो व्यक्ति अपने पिता का भक्त होता है..!
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७.चतुर्थेश यदि तृतीय भाव में हो तो व्यक्ति अपने पिता के बंधुओ से वैर रखता है..!
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८.चतुर्थेश यदि पाप गृह होकर सप्तम में दूषित हो तो ऐसे व्यक्ति की पत्नी अपने सास ससुर की सेवा नहीं करती..!
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९.छठे भाव का स्वामी यदि पंचम में हो तो व्यक्ति का पुत्र ही वैरी की तरह व्यव्हार करता है..!
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१०.छठे भाव का स्वामी यदि एकादश में पाप गृह हो तो व्यक्ति को शत्रु प्राणघातक ;पीड़ा पहुचातेहैं.. और शुभ ग्रह होकर हो तो चोरो द्वारा धन हानि या व्यापर के साथी से धोखा..!
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११.सप्तमेश पाप ग्रह होकर अगर छठे भाव में हो तो संसर्ग जन्य रोग होते हैं..!(sexually transmitted diseases)
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१२. आठवे भाव का स्वामी अगर पंचम भाव में हो और अमावास का जन्म हो तो ऐसे योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति अधिक जीवित नहीं रहता और अगर जीवित रह गया तो महा धूर्त होता है..!

 

१३ .लग्नेश जब त्रिकभावो में पाप ग्रहों से युति करे, विशेष रुप से शनि मंगल से, तो जातक में चोर प्रवृत्ति आ जाती है..

१४ .जब कुंडली में सप्तमेश , द्वादशेश या शुक्र में से कोई गृह त्रिक भावो में स्थित होके मंगल शनि या राहू से युति करता है, तो व्यक्ति के अनेक शारीरिक सम्बन्ध हुआ करते हैं..

१५ .पाप ग्रहों से पीड़ित शुक्र जब नीच राशि का हो तो व्यक्ति का चरित्र दूषित हो सकता है..

१६ . जब चन्द्र पीड़ित होकर द्वितीय भाव में हो तो व्यक्ति गप्पेबाज होता है.

१७ .नवम भाव में पीड़ित चन्द्र नास्तिकता दे सकता है..

१८ .छठे भाव में स्थित शुक्र का गुरु से युति या दृष्टी सम्बन्ध मधुमेह दे सकता है..

१९ . शुक्र चन्द्र और बुध अस्त हो और मारकेश हो इनमे से कोई गृह तो मृत्यु मधुमेह से ही हुआ करती है.

२० .जब कुंडली में शुक्र यदि मारक होकर पाप गृह से युत या दृष्ट हो तो जातक को जननेंद्रिय सम्बन्धी रोग हुआ करते हैं..

२१ .कुंडली में यदि लग्नेश के साथ छठे भाव का स्वामी केंद्र या त्रिकोण में हो और राहू केतु भी इनके साथ हो तो कारावास योग होता है..
अगर इस योग में शनि भी शामिल हो तो जेल में तकलीफ भी होती है..

!!राम!!

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