ज्योतिष सूत्र

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ज्योतिष सूत्र 

कुंडली देखने के सूत्रों में कुछ गहन सूत्र मूल ग्रंथो में हैं जिनपर प्रारंभिक ज्योतिष वेत्ता ही ध्यान देते हैं, अक्सर पुराने व्यावसायिक ज्योतिषियों को हमने इन मूल सुत्रो को ध्यान में रखते नहीं देखा..!
जैसे किसी भी भविष्य कथन पर पहुचने से पूर्व भाव और भावेश के बल का आंकलन अवश्य करना चाहिए..
कोई भाव बलहीन है तो उससे सम्बंधित शुभ फलो में न्यूनता आएगी और तत्संबंधी दोष बढ़ जायेंगे..
षड्बल विधि गणित पर आधारित है, और विस्तार मांगती है..अतः हम यहाँ सामान्य किन्तु महत्वपूर्ण सूत्रों पर चर्चा करेंगे..

अब भाव के बल को जानने की विधि समझिये..
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१. जिस भाव में दुस्थान का स्वामी बेठा हो उस भाव का नाश हो जाता है, किन्तु उसको शुभ गृह देखे तो ऐसा नहीं होता..
२.भाव का फल ज्ञात करने की सीधी विधि भाव के स्वामी का बल ज्ञात करना है..(शत्रु या मित्र राशि में है या उच्च या नीच..)
३.जिस भाव का विचार करना हो उस भाव से चतुर्थ ,पंचम, सप्तम,नवम, दशम, में शुभ गृह हो तो भाव को बल मिलता है और पाप गृह हो तो विपरीत फल प्राप्त होता है..(कुंडली काल पुरुष की देह है..अतः किसी अंग विशेष का दोषपूर्ण होने पर बाकी अंगो पर भी प्रभाव पड़ता ही है)
४.जिस भाव का बल ज्ञात करना हो उसको जन्म लग्न और चन्द्र लग्न से निम्न तथ्यों से जांचना चाहिए..
:-भाव (राशि कैसी है? द्विपद,चतुष्पद)
:-भाव स्वामी(कहा बेठा है, किस स्थिति में है, अस्त तो नहीं?)
:- भाव कारक( उपरोक्त)
:-भाव में जो गृह बेठे हैं..(शुभ या पाप)
:- भाव को जो गृह देखते हैं..( शुभ या पाप)
:-भाव स्वामी के साथ जो गृह बेठे हैं..
:-उसके स्वामी को जो गृह देखते हैं..
:- उसके कारक के साथ जो ग्रह बेठे हो..
:- उसके कारक को जो गृह देखते हो..

इन सब तथ्यों को जांचने के बाद ग्रहों की प्रकृति और भाव प्रकृति आदि का तारतम्य बिठाते हुए भविष्य कथन की ओर आगे बढ़ना चाहिए..
राम!!

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