प्रेम प्रसंग के योग

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प्रेम प्रसंग योग

किसी भी जन्मकुंडली में प्रेम प्रसंग की संभावना के लिए निम्न भाव, भावेशों व ग्रहों का अध्ययन किया जाता है।

१. लग्न व लग्नेश( स्वयं)(चेतना)(अहम्)
२.पंचम व पंचमेश(प्रेम)(बुद्धि)(निर्णय)
३.सप्तम व सप्तमेश(विवाह)

शुक्र- प्रेम कारक ग्रह।
शनि- हठी स्वभाव।

सूत्र:- जब लग्नेश, पंचमेश, व सप्तमेश का शुभ संबंध हो,तो प्रेम सफल होकर विवाह में अग्रसर होता है। शुक्र अस्त या पीड़ित हो तो प्रेम में शोषण होगा(शारीरिक)।
सप्तम में शनि की उपस्थिति या दृष्टि विवाह में हठ दर्शाती है। वहीं एक योग यह भी है की यदि लग्नेश बली हो और पंचमेश निर्बल तो व्यक्ति प्रेम में पूरी तरह वफादार होता है लेकिन उसकी प्रेमिका/प्रेमी उसे धोखा दे देते हैं।
उच्च का शुक्र माँ के समान निर्मल ह्रदय प्रेमी बनाता है वही बुद्ध मंगल से युत शुक्र चरित्रहीन कर देता है जहाँ प्रेम मात्र भोग बन जाता है।

!!राम!!

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